
।। विशुनपुरवा पुलिस चौकी: सुरक्षा की पहरेदार बनी लाचार, महीनों बाद भी दोहरे हत्याकांड से पर्दा उठाने में नाकाम।।
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती। जनपद के रूधौली थाना अंतर्गत विशुनपुरवा पुलिस चौकी का इलाका इस समय अपराधियों का सुरक्षित गढ़ बनता जा रहा है। यहाँ पुलिस की मौजूदगी केवल कागजों तक ही सीमित है, जबकि वास्तविकता यह है कि कानून-व्यवस्था पूरी तरह ‘भगवान भरोसे’ चल रही है। हद तो तब हो गई जब पुलिस चौकी से महज कुछ कदमों की दूरी पर नरकंकाल पड़ा रहा और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी।
💫चौकी के बगल में सड़ती रही लाश, पुलिस सोती रही
विशुनपुरवा पुलिस चौकी के ठीक बगल में एक नरकंकाल का मिलना स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। जिस स्थान पर 24 घंटे वर्दीधारी मुस्तैद रहने का दावा करते हैं, वहीं एक शव सड़कर कंकाल में बदल गया, लेकिन किसी भी जिम्मेदार अधिकारी की नजर उस पर नहीं पड़ी। यह घटना न केवल सुरक्षा व्यवस्था में सेंधमारी को दर्शाती है, बल्कि पुलिस की संवेदनहीनता और लापरवाही का जीता-जागता प्रमाण भी है।
💫300 मीटर की दूरी पर दूसरा शव, फिर भी सन्नाटा
यह कोई इकलौती घटना नहीं है। चौकी से महज 300 मीटर दूर स्थित एक पुल के नीचे पहले भी एक लाश बरामद हो चुकी है। दो-दो शवों की मौजूदगी के बाद भी जांच के नाम पर पुलिस का ‘खाली हाथ’ होना यह बताने के लिए पर्याप्त है कि पुलिस प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से ले रहा है। न तो कोई सुराग मिला और न ही कातिलों तक पहुंचने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया गया।
💫क्या विशुनपुरवा चौकी प्रभारी बेखबर हैं?
स्थानीय लोगों में चौकी प्रभारी की भूमिका को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है। नागरिकों का आरोप है कि पुलिस का न तो कोई जमीनी खुफिया तंत्र काम कर रहा है और न ही गश्त का कोई असर दिख रहा है। जनता का कहना है कि हर बार सूचना हम देते हैं, लेकिन प्रशासन की कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है।
💫सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
चौकी की नाक के नीचे अपराध: पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरा अविश्वास।
🔥निष्क्रिय खुफिया तंत्र: अपराधियों के हौसले बुलंद।
💫जवाबदेही का अभाव: क्या उच्चाधिकारी इस लचर व्यवस्था की सुध लेंगे?
रूधौली क्षेत्र में बढ़ती इन घटनाओं ने आम जनता में डर का माहौल पैदा कर दिया है। सवाल यह है कि आखिर पुलिस कब तक अपनी विफलता का ठीकरा अनभिज्ञता पर फोड़ेगी? क्या बस्ती पुलिस के आला अधिकारी इस मामले में कोई ठोस हस्तक्षेप करेंगे, या विशुनपुरवा चौकी इसी तरह अपराधियों की शरणस्थली बनी रहेगी?



















